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लोको पायलट की सूझबूझ से चार जिंदगियां बची ।चलती ट्रेन के सामने रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने आये लोगों को देख चालक ने लगाई इमरजेंसी ब्रेक, डीआरएम ने किया सम्मानित

लोको पायलट की सूझबूझ से चार जिंदगियां बची ।चलती ट्रेन के सामने रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने आये लोगों को देख चालक ने लगाई इमरजेंसी ब्रेक, डीआरएम ने किया सम्मानि

 

 

 

एंकर : समस्तीपुर रेलवे मंडल के लोको पायलट ने नौकरी के साथ सामाजिक दायित्व व मानवता का मिशाल पेश करते हुए परिचालन के दौरान मंडल के विभिन्न खंडों पर दो महीने के दौरान ट्रेन के नीचे जिंदगी खत्म करने आये चार लोगों की जिंगदगी बचाई। जिसमें दो महिलाएं, एक बच्चा व एक पुरूष शामिल हैं। लोगों की जिंगदगी बचाने वाले लोको पायलटों को अब डीआरएम ज्येाति प्रकाश मिश्रा ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। डीआरएम ने बताया कि सभी मामलों में लोको पायलटों ने असाधारण सतर्कता दिखाई है। समय रहते ट्रेन रोकने के साथ ही वे ट्रैक पर उतरे और लोगों को समझा-बुझाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बाद में सभी को स्थानीय ग्रामीणों के हवाले किया, जिससे उनकी जिंदगी बच पायी।

 

पहली घटना 22 जून को ट्रेन नंबर 63346 समस्तीपुर – सहरसा सवारी गाड़ी सहरसा की ओर जा रही थी। तभी सलौना व इमली स्टेशनों के बीच लोको पायलट अभय कुमार व सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार को रेल पटरी पर एक महिला अपने बच्चे के साथ लेटी हुई दिखाई दी।

लोको पायलट ने बिना एक पल गंवाए असाधारण तत्परता दिखाते हुए तत्काल इमरजेंसी ब्रेक का इस्तेमाल किया और ट्रेन को सुरक्षित दूरी पर रोकने में सफलता पाई। इसके बाद दोनों रेलकर्मियों ने नीचे उतरकर उस महिला को समझा-बुझाकर ट्रैक से हटाया और ग्रामीणों के सुरक्षित हाथों में सौंप दिया। ट्रैक क्लियर होने के बाद ही ट्रेन आगे के लिए रवाना हुई।

 

दूसरी घटना 01 मई को ट्रेन नंबर 75230 रक्सौल – दरभंगा सवारी गाड़ी रक्सौल से दरभंगा की ओर आ रही थी। इसी क्रम में चालक दल को ढेंग और रीगा स्टेशनों के बीच अचानक ट्रैक पर एक लड़का लेटा हुआ दिखाई दिया। चालक दल के लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने सूझबूझ का परिचय दिखाते हुए आपातकालीन ब्रेक लगाई। सही समय पर ट्रेन रुकने से बच्चे की जान बाल-बाल बच गई।

तीसरी 22 मई रक्सौल- सिकटा स्टेशन के बीच सामने आई, जब लोको पायलट मनोज कुमार -2 और सहायक लोको पायलट मणिभूषण कुमार एक गुड्स ट्रेन लेकर जा रहे थे। भारी-भरकम मालगाड़ी होने के बावजूद, जब उन्हें ट्रैक पर एक महिला सोती हुई दिखाई दी, तो उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोक दी। महिला पहले रेलवे ट्रैक से हट नहीं रही थी तब सहायक लोको पायलट ने बच्चे को अपनी गोद में लेकर आगे बढ़ना शुरू किया। बच्चे के पीछे-पीछे महिला भी ट्रैक से हट गई। पूछताछ में उसने बताया कि पति के छोड़ देने से परेशान होकर वह बच्चे के साथ आत्महत्या करने आई थी। बाद में दोनों को ट्रेन से स्टेशन लाया गया और ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया। डीआरमए ने कहा कि ये घटनाएं साबित करती हैं कि रेलकर्मी केवल ट्रेन संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं। लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की सजगता, त्वरित निर्णय और संवेदनशीलता की वजह से चार लोगों की जान बचाई जा सकी। ट्रेन परिचालन के दौरान सभी लोको पायलट को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर सजग रहे तो लोगों की जिंगदगी को बचा सकेंगे।

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