
समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क : समस्तीपुर जिले के बिथान प्रखंड क्षेत्र की मरथुआ पंचायत स्थित सोन नहर आज अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। कभी सालों भर पानी से भरा रहने वाला यह नहर आज पूरी तरह सूख चुका है। लगातार गिरते जल स्तर , उपेक्षा और बढ़ते अतिक्रमण के कारण नहर का स्वरूप तेजी से समाप्त होता जा रहा है।
कभी पानी से भरी रहने वाली नहर की सूखी धरती पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। जिससे इसके भविष्य को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। एक समय सोन नहर मरथुआ पंचायत ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों की जीवनरेखा मानी जाती थी। करीब दो दशक पहले तक इस नहर में वर्षभर पर्याप्त पानी रहता था। गर्मी, बरसात और सर्दी- हर मौसम में नहर जल से भरी रहती थी। इसका लाभ किसानों, मत्स्य पालकों, पशुपालकों और आम ग्रामीणों को मिलता था। नहर का जल आसपास की कृषि भूमि को सिंचित करता था, जिससे किसानों की खेती समृद्ध होती थी और फसलों का उत्पादन बेहतर होता था। सोन नहर प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रमुख केंद्र हुआ करती थी। सर्दियों के मौसम में यहां विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन होता था। विशेष रूप से साइबेरियाई और अन्य जल पक्षियों का झुंड इस नहर को अपना अस्थायी आश्रय बनाता था। सुबह और शाम के समय पक्षियों की चहचहाहट तथा उनका मनमोहक दृश्य लोगों को आकर्षित करता था।
नहर को लेकर स्थानीय लोगों का बताना हैं कि एक समय ऐसा था जब नहर के किनारे पक्षियों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते थे। लेकिन पानी के अभाव में अब पक्षियों का आगमन पूरी तरह बंद हो गया है। नहर केवल प्राकृतिक धरोहर नहीं थी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला भी थी। वर्षों तक यहां बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन होता रहा। जिससे सैकड़ों मत्स्य कृषक परिवारों की आजीविका चलती थी। वर्तमान में नहर के सूख जाने से मत्स्य पालन की गतिविधियां लगभग ठप पड़ चुकी हैं। इससे जुड़े परिवारों के सामने रोजगार और आय का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सोन नहर के जल पर निर्भर रहने वाली सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई इससे प्रभावित हो गई है।









