क्या बारूद के ढेर पर बसा है सीवान? पटाखा विस्फोट में 5 की मौ*त, थानाध्यक्ष और चौकीदार निलं
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समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क से| सीवान
सीवान में क्या अवैध पटाखा निर्माण लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है? क्या बारूद के ढेर पर बसा है सीवान, जहां अवैध रूप से पटाखे बनाने के दौरान हुए विस्फोट में पांच लोगों की मौत हो गई? जिले के जामो बाजार थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में शुक्रवार को हुए भीषण विस्फोट के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में थाना स्तर पर लापरवाही के आरोप में जामो बाजार थानाध्यक्ष धीरज कुमार और स्थानीय चौकीदार चंद्रिका मांझी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
पांच लोगों की मौत के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई
आलमपुर गांव में अवैध रूप से पटाखा बनाने के दौरान हुए विस्फोट ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। थानाध्यक्ष और चौकीदार के निलंबन के बाद अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पटाखा निर्माण की गतिविधियां कब से चल रही थीं और इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों को थी या नहीं।
डीएम-एसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
घटना के बाद डीएम विजय प्रकाश मीणा, एसपी भारत सोनी और महाराजगंज के अनुमंडल पदाधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर अग्निशमन विभाग, बिजली विभाग, डॉग स्क्वायड और मेडिकल टीम को बुलाया गया। विस्फोट के कारणों का पता लगाने और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया।
पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, संबंधित लोगों के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
विशेष टीम गठित, अवैध पटाखा निर्माण की जांच
एसपी भारत सोनी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, महाराजगंज के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई है। मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी महाराजगंज के सर्किल इंस्पेक्टर को सौंपी गई है।
पुलिस विस्फोट के कारणों, पटाखा निर्माण से जुड़ी गतिविधियों और घटना के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अवैध पटाखा निर्माण में कौन-कौन लोग शामिल थे और सुरक्षा नियमों की अनदेखी कैसे हुई।
बड़ा सवाल: हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
आलमपुर में पांच लोगों की मौत के बाद थानाध्यक्ष और चौकीदार पर कार्रवाई तो हुई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध पटाखा निर्माण की गतिविधियों पर पहले रोक क्यों नहीं लगी? क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी थी? क्या जिले में ऐसे अन्य ठिकाने भी हैं, जहां बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच लोगों की जिंदगी खतरे में है?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल, पांच मौतों के बाद सीवान में अवैध पटाखा निर्माण और स्थानीय निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।








