
समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क : समस्तीपुर में आठ करोड़ की लागत से निर्माण हो रहे पुल की अजब कहानी है ।इस पुल निर्माण का मुद्दा चुनाव में ही ग्रामीणों के द्वारा उठाया जाता है लेकिन चुनाव खत्म होते ही पुल निर्माण का मुद्दा खत्म हो जाता है । दरसल यह पुल समस्तीपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर विद्यापतिनगर के अखाड़ा घाट की है जहां 2013 में गंगा नदी की सहायक नदी वाया नदी के ऊपर तीन जिलों को जोड़ने के लिए आठ करोड़ रुपए की लागत से आरसीसी पुल का शिलान्यास वर्तमान सरायरंजन विधानसभा के विधायक और बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने किया । एक दशक बीत जाने के बाद भी इस पुल का पांच पिलर ही बन पाया और वो भी अब जर्जर हो चुका है । बाढ़ के समय में लोग नाव से ही आवागवन करते हैं। जबकि समान्य दिनों में बाढ़ का पानी सूखने के बाद ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर मिट्टी भर कर आते जाते हैं। ग्रामीणों का बताना है कि 2013 में जब इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि मऊ धनेशपुर, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। लोग आसानी से इस इलाके से हरी सब्जी और अन्य आनाज विद्यापतिनगर के बाजार में ला सकेंगे। लेकिन, सरकारी व्यवस्था के कारण लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। जब पाया निर्माण बंद हुआ, तब लोगों को जानकारी मिली कि बिना जमीन अधिग्रहण के ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया था। जब जमीन के स्वामियों ने इसका विरोध किया, तो पुल का निर्माण रूक गया।

सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि की गलत नीति के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आखिर बिना जमीन अधिग्रहण किए पुल का निर्माण 2013 में कैसे शुरू किया गया ?करोंड़ों रुपए खर्च करने के बाद काम को बंद किया गया। यहां पर सरकारी फंड का बंदर बांट किया गया है। दियारा इलाके के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। जो पीलर बनाए गए, उसका सरिया अब खराब हो गया है। अब नये सिरे से पुल का निर्माण करना होगा।
लंबे समय से इस इलाके के लोग पुल की आस लगाए हुए हैं। उन्होंने अखाड़ा घाट पर पुल बनने से समस्तीपुर के साथ ही बेगूसराय के लोगों को फायदा मिलता। विद्यापतिनगर का इलाका खत्म होने के बाद 4 किलोमीटर बेगूसराय और फिर गंगा नदी है। वहां पर पुल बना दिया जाय, तो लोग सीधा बाढ़ पहुंच जाएंगे। पुल बनने से यहां के किसान अपनी हरी सब्जी के साथ ही दूध, अनाज सीधा पटना के मंडी ले जा सकेंगे। जिससे उन्हें फायदा मिलता। लेकिन चुनाव के समय सिर्फ इंजीनियर को भेज दिया जाता है। ताकी लोगों को लगे की काम शुरू होने वाला है । ग्रामीण बताते हैं कि पुल नहीं होने से इस घाट पर नौका दुर्घटना में कई लोगों की अब तक जान जा चुकी है।









