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15 साल बाद भी अधूरा महासेतु,समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, नालंदा व नवादा के लोगों का इंतजार बढ़ा,

बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना का निर्माण कार्य अधूरा।

बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना का निर्माण कार्य अधूरा।

बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना का निर्माण कार्य अधूरा।

समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क:बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना का निर्माण कार्य शिलान्यास के 15 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है।दूसरी ओर निर्माण के दौरान लगातार हो रहे हादसों ने परियोजना की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मटिऔर के समीप सीएफटी मशीन में तकनीकी खराबी के कारण हुए हादसे में करीब आधा दर्जन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज चल रहा है।निर्माणाधीन परियोजना में इससे पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बिनगामा और डुमरी के समीप एनएच-122बी पर फ्लाईओवर की पाइलिंग के दौरान क्रेन से गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी।वहीं 22 सितंबर 2024 को नंदिनी लगुनिया रेलवे स्टेशन के पास निर्माणाधीन पुल का एक स्पैन टूटकर गिर गया था। यह स्पैन निर्माण के लगभग सात वर्ष बाद क्षतिग्रस्त हुआ था। उस समय निर्माण एजेंसी ने रातोंरात मलबा हटाकर इसे तकनीकी कारणों से बदले जाने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था, लेकिन घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे थे।

2011 में ही तत्कालीन सीएम ने किया था उद्घाटन

परियोजना का शिलान्यास वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। परियोजना को वर्ष 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समय पर कार्य पूरा नहीं होने पर पहले 2018 और बाद में दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बावजूद वर्ष 2026 तक भी परियोजना अधूरी है।परियोजना के तहत गंगा नदी पर 5.52 किलोमीटर लंबा पुल तथा लगभग 45 किलोमीटर संपर्क सड़क का निर्माण होना है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दी गई थी।

परियोजना में राज्य सरकार की 307.50 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार की 277.50 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी निर्धारित की गई थी, जबकि शेष राशि निर्माण एजेंसी को वहन करनी थी।कई सुदूर जिलों को जोड़ेगी यह सड़क

महासेतु के निर्माण के बाद नवादा, नालंदा, बख्तियारपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी समेत उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों के बीच आवागमन सुगम होगा। साथ ही लोगों का यात्रा समय भी काफी कम हो जाएगा। फिलहाल परियोजना की धीमी प्रगति और लगातार हो रहे हादसे आम लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 तक केवल 32 प्रतिशत कार्य पूरा हो पाया था। वर्तमान में करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हुआ है। निर्माण की धीमी गति को देखते हुए स्थानीय लोगों का मानना है कि परियोजना को पूरा होने में अभी दो से तीन वर्ष और लग सकते हैं।

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