
समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क : समस्तीपुर के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा ने गुरुवार को अपने 5 वें दीक्षारंभ 2026 कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस कार्यक्रम में 400 से अधिक नव-प्रवेशित स्नातक छात्र-छात्राओं, संकाय सदस्यों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ छात्रों के पंजीकरण, अतिथियों के आगमन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर उल्लास के साथ वंदे मातरम का गायन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि स्वामी सर्वोत्तमानंद, कुलपति, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान (आरकेएमवेरी), बेलूर मठ, पश्चिम बंगाल ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के दृष्टिकोण का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य में पहले से मौजूद पूर्णता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने युवाओं से लचीलापन और सेवा-भाव विकसित करने का आह्वान किया और कहा कि बौद्धिक विकास के साथ नैतिक अखंडता भी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, “कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र को अन्न खिलाने का एक पवित्र कर्तव्य है, जिसके लिए वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ कृषक समुदाय के प्रति गहरी सहानुभूति भी आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूसा विश्वविद्यालय ने बहुत तेज गति से प्रगति की है और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते डॉ. आर. सी. अग्रवाल, पूर्व उपमहानिदेशक (कृषि शिक्षा), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने दीक्षारंभ कार्यक्रम के राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दीक्षारंभ कार्यक्रम की पहल 2022 में पूसा विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय द्वारा की गई थी। छात्रों के लिए इसके व्यापक लाभों को देखते हुए, उन्होंने आईसीएआर में शिक्षा उपमहानिदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 2023 में इसे देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य कर दिया।
उन्होंने कहा कि स्कूल से विश्वविद्यालय में संक्रमण कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है, ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक अनुकूलन के लिए ऐसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूसा दीक्षारंभ कार्यक्रम का समग्र मॉडल आज भी एक आदर्श बेंचमार्क के रूप में कार्य कर रहा है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने युवा मस्तिष्कों को उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पेशेवर सफलता के साथ-साथ विश्वविद्यालय छात्रों में मजबूत चरित्र और राष्ट्र निर्माण की गहरी भावना भी विकसित करना चाहता है।
उन्होंने कहा, “महान संस्थाएं केवल इमारतों से नहीं, बल्कि छात्रों के अनुशासन और समर्पण से बनती हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को विश्वविद्यालय की उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का लाभ उठाकर सतत समाधान खोजने के लिए नवाचार करना चाहिए और ऐसे नैतिक नेतृत्वकर्ता बनना चाहिए जो राष्ट्रीय प्रगति और ग्रामीण उत्थान को प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम के दौरान निदेशक पीजीसीए डॉ मयंक राय, निदेशक स्कूल आफ़ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट डॉ रामदत्त, डीन फिशरीज डॉ पी पी श्रीवास्तव, लाइब्रेरियन डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ रितंभरा सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे I









