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बारिश नहीं होने से निजी सिंचाई पर बढ़ी निर्भरता, महंगा पटवन और बिजली संकट ने बढ़ाई किसानों की चिंता कमजोर मानसून के कारण धान रोपनी की रफ्तार थमी, सिर्फ 22% रोपाई

बारिश नहीं होने से निजी सिंचाई पर बढ़ी निर्भरता, महंगा पटवन और बिजली संकट ने बढ़ाई किसानों की चिंता कमजोर मानसून के कारण धान रोपनी की रफ्तार थमी, सिर्फ 22% रोपाई

समस्तीपुर हेडलाइन डेस्क- जिले में कमजोर मानसून नहीं होने से धान की रोपनी की रफ्तार धीमी पड़ गई है। पिछले दो दिनों में हुई हल्की बारिश के बाद कुछ प्रखंडों में किसानों ने धान की रोपाई शुरू की, लेकिन अधिकांश गांवों में खेत अब भी पानी के इंतजार में हैं। महंगी सिंचाई, बिजली आपूर्ति की समस्या और निजी नलकूप का बढ़ता खर्च किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जिले में इस वर्ष करीब 76 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है। कृषि विभाग के अनुसार धान बीज वितरण का कार्य पूरा हो चुका है। अब तक करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हुई है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 22 प्रतिशत है। विभाग का कहना है कि पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण रोपाई अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है।

जिले में धान रोपाई लगातार जारी है, लेकिन मानसून कमजोर रहने से इसकी रफ्तार प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अच्छी बारिश होगी, रोपाई का प्रतिशत तेजी से बढ़ेगा। – डॉ. सुमित सौरव, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर

मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना होने पर खेतों की तैयारी पहले से पूरी रखें। जहां संभव हो, खेतों में उपलब्ध नमी को सुरक्षित रखने के लिए मेड़बंदी करें। कृषि विभाग की सलाह के अनुसार देर से रोपाई की स्थिति में कम अवधि वाली धान की किस्मों का चयन किया जा सकता है। सिंचाई और कृषि योजनाओं की जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क करें।कल्याणपुर के सिमरिया भिंडी गांव के किसान लालबाबू झा ने बताया कि उनके इलाके में अब तक बहुत कम किसानों ने धान की रोपाई की है। बारिश नहीं होने से खेतों में पर्याप्त पानी नहीं है। बिजली आपूर्ति भी कई दिनों से बाधित रहने से सिंचाई प्रभावित है। निजी नलकूप से पटवन कर धान की खेती करना छोटे और मध्यम किसानों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है। वहीं उजियारपुर के महेशपट्टी के किसान नवीन यादव ने बताया कि धान की खेती मानसून पर निर्भर है। लगातार बारिश नहीं होने से रोपाई में देरी हो रही है। डीजल और निजी सिंचाई का खर्च बढ़ने से किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। कमजोर मानसून का असर यदि जारी रहा तो जिले में धान उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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